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Wednesday, August 5, 2015

भस्त्रिका प्राणायाम

सात सरल प्राणायाम
सात सुरों से मधुर संगीत बनता है, सात रंगों से सुंदर इंद्रधनुष का निर्माण होता है। वैसे ही सात सरल प्राणायाम से जीवन सवरता है।
1.            भस्त्रिका प्राणायाम-
. विधि- नासिकाओं से मध्यम गति से 2 से 3 सेकेण्ड श्वास को फेफड़ों में भरना तथा उसी गति से श्वासों को बाहर छोड़ना। श्वास को सिर्फ छाती में भरें। पेट में भरें।
. समय- इस प्राणायाम को 3-5 मिनट तक करना चाहिए।
. संकल्प- मन में विचार करें कि चारों ओर अमृत वर्षा हो रही हैं। ईष्वर की कृपा, करुणा, ममता, प्रेम बरस रहा है। ऋषि, मुनि, साधु, संत हमें आषीष दे रहे हैं। इस प्राणवायु द्वारा हम अपने शरीर में इन दैवी सद्गुणों और पूर्वजों के आषीष धारण कर रहे हैं।
विषेष- प्रसन्नता से, आनंद से, शान्त चित्त होकर धैर्य से सांसों को फेफड़ों में भरे और छोड़े। सांस लेने और छोड़ने में एक लयबद्धता हो। हर सांस के साथ ओम का ध्यान हो। ध्यान करें कि मेरे पंचप्राण (प्राण, अपान, उदान, समान एवं ध्यान सबल हो रहे हैं)                                                     

लाभ- शारीरिक एवं मानसिक रोगों से छुटकारा होता है। हृदय एवं फेफड़ों को स्वस्थ बनाने में लाभकारी है। माईग्रेन, सर्दी, जुकाम, एलर्जी, सरदर्द, अस्थमा, कंपवात, दुर्बलता, नर्वस सिस्टम आदि रोगों आदि रोगों में लाभ होता है। टेन्षन, डिप्रेषन, स्ट्रेस, तनाव से छुटकारा प्राप्त होता है। इससे खून परिषुद्ध होता है। जिससे खून के विकारों जैसे- भ्क्स्ए स्क्स्ए ब्ीवसमेजमतवसए भ्ंमउवहसवइपदए ज्तलहसमबमतपकम ज्ीलतवपक में लाभ होता है।