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Saturday, August 1, 2015

“मातृ देवो भव, पितृ देवो भव, आचार्यदेवो भव, अतिथिदेवो भव” की संस्कृति अपनाओ!
 -स्वामी रामदेव



अतीत को कभी विस्म्रत न करो, अतीत का बोध हमें गलतियों से बचाता है।
 -स्वामी रामदेव



यदि बचपन व माँ की कोख की याद रहे तो हम कभी भी माँ-बाप के क्रतघ्न नहीं हो सकते। अपमान की ऊचाईयाँ छूने के बाद भी अतीत की याद व्यक्ति के जमीन से पैर नहीं उखडने देती।
 -स्वामी रामदेव



सुख बाहर से नहीं भीतर से आता है।
 -स्वामी रामदेव



भगवान सदा हमें हमारी क्षमता, पात्रता व श्रम से अधिक ही प्रदान करते हैं।
 -स्वामी रामदेव