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Wednesday, August 5, 2015

उपयोगी मुद्राएं व लाभ

1.            ध्यान मुद्रा: हाथों के अंगूठों से तर्जनी अंगुलियों के अग्रभागों को मिलाना बाकी सभी अंगुलियाँ सीधी रखें। इसे ज्ञान मुद्रा/ योग मुद्रा भी कहते हैं।
लाभ: एकाग्रता स्मरण शक्ति बढ़ती है। क्रोध का नाष, अनिद्रा, तनाव, सिरदर्द दूर होता है।
2.            वायु मुद्रा: तर्जनी अंगुली को अंगूठे के मूल में लगाना अंगूठे से हल्का सा दबाना, बाकी अंगुलियों को सीधी रखें।
लाभ: वायु विकारों, गठिया, घुटनों का दर्द, पक्षाघात, कम्पवात, गर्दन रीढ़ के दर्द में लाभकारी।
3.            शून्य मुद्रा: मध्यमा अंगुली को अंगूठे के मूल में लगाना अंगूठे से हल्का सा दबाना, शेष अंगुलियाँ सीधी रखें।
लाभ: कान के रोग, हृदय रोग, मसूड़ों गले के रोगों में लाभकारी।
4.            पृथ्वी मुद्रा: अनामिका अंगूठे के अग्रभागों को मिलाना, शेष अंगुलियाँ सीधी रखें।
लाभ: शारीरिक दुर्बलता, पाचन शक्ति विटामिनों की कमी को दूर करता है।
5.            वरुण मुद्रा: कनिष्ठा अंगूठे के अग्रभागों को मिलाना।
लाभ: रक्तविकार, मुहासों तथा जल तत्व की कमी को दूर करता है। चेहरा सुन्दर बनाता है।
6.            प्राण मुद्रा: कनिष्ठा अनामिका दोनों के अग्रभागों को एकसाथ अंगूठे के अग्रभाग से मिलना।
7.            अपान मुद्रा: मध्यमा अनामिका के अग्रभागों को एक साथ अंगूठे के अग्रभाग से मिलाना।

लाभ: अपान वायु, कब्ज, बवासीर आदि में लाभकारी।